Fabric Square · गाइड

लॉट खोए बिना जॉब वर्क का हिसाब

जॉब वर्क के लॉट असल में कहाँ गुम होते हैं, एक लॉट का शुरू से आखिर तक हिसाब कैसे रखें, और कारीगरों को ऐसे आँकड़ों पर पैसे दें जो दोनों को मंज़ूर हों.

जॉब वर्क की असली दिक्कत

जॉब वर्क धंधे का वह हिस्सा है जो आपकी अपनी चार दीवारों के बाहर चलता है. कपड़ा कारीगर के पास जाता है, वहाँ उस पर कुछ काम होता है, और उसमें से कुछ वापस आता है. बीच के इस पूरे वक्त में लिखा-पढ़ी बस इतनी होती है — डायरी में एक लाइन और WhatsApp पर एक फोटो.

पाँच लॉट तक यह चल जाता है. पचास हो जाएँ तो काम के सवाल दो ही रह जाते हैं — किसके पास क्या बाकी पड़ा है, और उसमें से कितना वापस आया — और फोन घुमाए बिना उनका जवाब किसी के पास नहीं होता.

लॉट कहाँ गुम होते हैं

लॉट सचमुच गुम कम ही होते हैं. गुम तो उनका हिसाब होता है — और नुकसान उतना ही होता है:

  • कपड़ा कारीगर को दे तो दिया पर रजिस्टर में चढ़ा ही नहीं, क्योंकि वह दुकान बंद होने के वक्त आया था.
  • थोड़ा माल वापस आया हो और उसे पूरा मान लिया जाए, तो रजिस्टर में चुपचाप कुछ बाकी बचता ही नहीं.
  • घट कितनी पड़ी, इस पर महीनों बाद बहस होती है, क्योंकि जिस दिन वह पड़ी उसी दिन का दोनों को मंज़ूर कोई आँकड़ा होता ही नहीं.
  • एक ही पार्टी के दो लॉट आपस में मिल जाते हैं, और फिर कोई भी लॉट बंद नहीं हो पाता.
  • सुधार के लिए माल दोबारा बाहर जाता है, पर कहीं लिखा नहीं जाता कि वह दो बार बाहर गया.

एक लॉट का शुरू से आखिर तक हिसाब

लॉट का हिसाब तभी टिकता है जब ये चार चीज़ें होते ही लिख ली जाएँ, महीने के आखिर में नहीं:

  1. क्या बाहर गया — कितना माल, कौन-सी क्वालिटी, और किस कारीगर के पास, जिस दिन गया उसी दिन.
  2. काम क्या है — कौन-सा प्रोसेस, तय हुआ भाव, और माल कब तक वापस आना चाहिए.
  3. क्या वापस आया और कब — थोड़ा आया हो तो उतना ही, पूरा नहीं.
  4. घट कितनी पड़ी या माल कितना रिजेक्ट निकला — उसी दिन दोनों तय करके लिख लें, बाद में बहस नहीं.

ये चार चीज़ें रजिस्टर में हों, तो किस कारीगर के पास कितना बाकी है यह सीधा जोड़ बन जाता है, और किसी को कुछ याद रखना नहीं पड़ता.

कारीगरों के पैसे सही चुकाना

कारीगरों से होने वाली ज़्यादातर तकरार नीयत की नहीं होती. दोनों के पास आँकड़े अलग होते हैं, क्योंकि दोनों ने अपने-अपने हिसाब से लिखे होते हैं.

पैसा दोनों तरफ एक ही लिखे हुए हिसाब से बने, तो बहस इस बात की नहीं रहती कि हुआ क्या था, भाव की रह जाती है — और भाव की बात तो सौदा है, लड़ाई नहीं.

  • पैसा याद से नहीं, वापस आया माल रजिस्टर में जितना चढ़ा है उसी से बने.
  • जिस कारीगर के नाम पर काम गया है, एडवांस और कटौती भी उसी के खाते में बैठें.
  • कारीगर हिसाब माँगे तो नया बनाकर बैठना न पड़े, बना-बनाया भेज दें.

Fabric Square यह कैसे करता है

जॉब वर्क अलग ऐप नहीं, उसी सॉफ्टवेयर का एक मॉड्यूल है. लॉट बाहर निकालें तो स्टॉक घट जाता है, वापस आए तो तैयार माल चढ़ जाता है, और कारीगर की बाकी अपने आप अपडेट हो जाती है — क्योंकि बाकी पूरा धंधा जिस हिसाब पर चलता है, जॉब वर्क भी उसी पर चलता है.

प्लान में क्या-क्या आता है, देखें

शुरुआत कहाँ से करें

डेमो में अपने एक हफ्ते के असली लॉट लेकर आइए — जिनमें थोड़ा माल वापस आया हो, वे उलझे हुए लॉट भी साथ लाइए. अपने ही आँकड़ों पर लगाए 20 मिनट किसी भी फीचर-लिस्ट से ज़्यादा बता देंगे.

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आखिरी बदलाव: 2026-08-07